रांची में नशे के कारोबार पर पुलिस की सख्ती के बीच बड़ा आंकड़ा: 338 गिरफ्तार आरोपियों में से 279 आए जेल से बाहर

राजधानी रांची में मादक पदार्थों की अवैध खरीद-फरोख्त पर लगाम लगाने के लिए पुलिस लगातार एक्शन ले रही है, लेकिन इसके बावजूद पकड़े गए आरोपियों के जमानत पर जेल से बाहर आने का सिलसिला थम नहीं रहा है। मिली जानकारी के अनुसार, जनवरी 2025 से सितंबर 2026 के दौरान रांची के विभिन्न थाना क्षेत्रों में एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत कुल 276 मामले दर्ज किए गए। इन मामलों में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने 338 लोगों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा था। हालांकि, इनमें से 31 अलग-अलग थाना क्षेत्रों से जुड़े 279 आरोपी अक्टूबर 2025 से सितंबर 2026 के बीच जेल से रिहा हो चुके हैं।

थानावार आंकड़ों पर नजर डालें तो, अवैध ब्राउन शुगर के लिए चर्चा में रहने वाले सुखदेवनगर थाना क्षेत्र से सबसे ज्यादा 83 आरोपी जेल से बाहर आए हैं। इसके अलावा तमाड़ और अरगोड़ा से 19-19, नामकुम से 18, रांची सदर से 15, तथा लोअर बाजार और डोरंडा से 14-14 आरोपी रिहा हुए हैं। सामने आए तथ्यों के मुताबिक, जेल से छूटने वाले अधिकांश आरोपियों के मामले ड्रग्स की ‘कम मात्रा’ (Small Quantity) से जुड़े थे। इस श्रेणी के मामलों में सजा का प्रावधान कम होने के कारण आरोपियों को कानूनी प्रक्रिया के तहत जल्दी जमानत मिल जाती है।

छोटी मात्रा के मामलों में जल्दी मिल सकती है जमानत
एनडीपीएस एक्ट के मामलों के जानकार अधिवक्ता राहुल पांडेय के अनुसार, इस कानून के तहत मादक पदार्थों की बरामदगी को मुख्य रूप से छोटी, मध्यम और व्यावसायिक (कमर्शियल) मात्रा की श्रेणियों में विभाजित किया गया है। यदि किसी आरोपी के पास से बहुत कम मात्रा में ड्रग्स बरामद होती है, तो ऐसे मामलों में अधिकतम एक साल तक की सजा का प्रावधान है। परिस्थितियों और कोर्ट के आदेश के आधार पर ऐसे आरोपियों को अपेक्षाकृत कम समय में जमानत मिल जाती है।

अधिवक्ता का कहना है कि कई बार मादक पदार्थों का सेवन करने वाले लोग अपनी लत की वजह से इन्हें खरीदते हैं। ऐसी स्थिति में यह समझना आवश्यक है कि कौन व्यक्ति सिर्फ नशे का आदी है और कौन तस्कर के रूप में सक्रिय है। ऐसे मामलों में नशे के आदी लोगों को सजा के बजाय नशामुक्ति केंद्रों में इलाज और पुनर्वास (Rehabilitation) की जरूरत होती है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि पुलिस की तरफ से कोर्ट में आरोपी की भूमिका और बरामदगी से जुड़े साक्ष्य पूरी मजबूती के साथ पेश नहीं किए जाते हैं, तो अभियोजन पक्ष थोड़ा कमजोर पड़ सकता है। हालांकि, किसी भी मामले में जमानत मिलना या न मिलना पूरी तरह से उपलब्ध सबूतों, कानूनी प्रावधानों और अदालत के विवेक पर निर्भर करता है।
मध्यम और व्यावसायिक मात्रा में जमानत के नियम सख्त
अधिवक्ता राहुल पांडेय के अनुसार, यदि मध्यम मात्रा में मादक पदार्थ पकड़ा जाता है, तो कानून के प्रावधानों के अनुसार सजा तय होती है। वहीं दूसरी ओर, यदि््् मादक पदार्थ ‘व्यासायिक मात्रा’ (Commercial Quantity) के दायरे में आता है, तो एनडीपीएस एक्ट के तहत 10 से लेकर 20 साल तक की कठोर कैद और 1 से 2 लाख रुपये तक के जुर्माने का कड़ा प्रावधान है।

एनडीपीएस एक्ट की धारा 37 के तहत व्यावसायिक मात्रा वाले मामलों में जमानत पाने की शर्तें बेहद कड़ी होती हैं। ऐसे मामलों में आरोपियों को आसानी से जमानत नहीं मिलती। हालांकि अंतिम निर्णय हमेशा अदालत के द्वारा मामले की परिस्थितियों को देखकर ही लिया जाता है।
किस मादक पदार्थ की कितनी मात्रा मानी जाती है?
एनडीपीएस कानून के अंतर्गत अलग-अलग नशीले पदार्थों के लिए ‘छोटी’ और ‘व्यासायिक’ मात्रा की सीमाएं तय की गई हैं, जो इस प्रकार हैं:
- गांजा: छोटी मात्रा 1 किलोग्राम तक, जबकि व्यावसायिक मात्रा 20 किलोग्राम या इससे अधिक।
- हेरोइन (ब्राउन शुगर): छोटी मात्रा 5 ग्राम तक, जबकि व्यावसायिक मात्रा 250 ग्राम या इससे अधिक।
- डोडा (पोस्ता भूसा): छोटी मात्रा 1 किलोग्राम तक, जबकि व्यावसायिक मात्रा 50 किलोग्राम या इससे अधिक।
- अफीम: छोटी मात्रा 25 ग्राम तक, जबकि व्यावसायिक मात्रा 2.5 किलोग्राम या इससे अधिक।
इन निर्धारित सीमाओं के बीच आने वाली मात्रा को ‘मध्यम मात्रा’ के रूप में गिना जाता है।
