ग्राम सभा का बड़ा फैसला: सरकारी कर्मचारी को सचिव नियुक्त करने का पुरजोर विरोध, आंदोलन की चेतावनी

सरायकेला-खरसावां जिले में ग्राम सभा की स्वायत्तता को लेकर स्थानीय ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है. सरकारी कर्मचारी को ग्राम सभा का सचिव बनाए जाने के सरकारी आदेश के खिलाफ ग्रामीणों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है और इसे अपनी पारंपरिक व्यवस्था में हस्तक्षेप बताया है.
झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले के स्थानीय गांवों में इन दिनों पंचायती राज और ग्राम सभा के अधिकारों को लेकर असंतोष की स्थिति बनी हुई है। हाल ही में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में ग्रामीणों ने सरकार के उस फैसले का पुरजोर विरोध किया है, जिसके तहत किसी सरकारी मुलाजिम या पंचायत सेवक को ग्राम सभा के सचिव पद की जिम्मेदारी सौंपने की बात कही जा रही है। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि यह कदम उनकी पारंपरिक शासन व्यवस्था और लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है।
पारंपरिक अधिकारों और पेसा (PESA) कानून का हवाला
बैठक के दौरान ग्रामीणों और स्थानीय आदिवासी नेताओं ने कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में पेसा (PESA – Panchayat Extension to Scheduled Areas) कानून लागू है। इस कानून के तहत ग्राम सभा को अपनी व्यवस्था खुद संचालित करने के व्यापक अधिकार प्राप्त हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, ग्राम सभा का सचिव कोई स्थानीय ग्रामीण ही होना चाहिए, जिसे गांव के लोग सर्वसम्मति से चुनें। किसी बाहरी या सरकारी कर्मचारी को इस पद पर बैठाने से ग्राम सभा की स्वायत्तता पूरी तरह खत्म हो जाएगी और गांवों के विकास कार्यों में नौकरशाही का दखल बढ़ जाएगा।
सरकारी आदेश के खिलाफ प्रस्ताव पारित
विभिन्न गांवों से आए प्रतिनिधियों की मौजूदगी में ग्राम सभा ने सर्वसम्मति से एक निंदा प्रस्ताव पारित किया है। इस प्रस्ताव के माध्यम से जिला प्रशासन और राज्य सरकार से मांग की गई है कि वे इस फैसले को तुरंत वापस लें। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी कर्मचारी को सचिव बनाकर स्थानीय स्तर पर होने वाले फैसलों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है, जिसे ग्रामीण किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे।
आंदोलन तेज करने की दी चेतावनी
ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया गया और ग्राम सभा के पारंपरिक अधिकारों को बहाल नहीं रखा गया, तो वे सड़क पर उतरने को मजबूर होंगे। आने वाले दिनों में प्रखंड (ब्लॉक) और जिला मुख्यालय का घेराव करने की रणनीति बनाई जा रही है। ग्रामीणों ने कहा कि वे अपनी जल, जंगल, जमीन और स्थानीय स्वशासन की रक्षा के लिए इस लड़ाई को आखिरी दम तक लड़ेंगे।


