मुख्य शीर्षक: गुमला समाचार: 43 वर्षों के इतिहास में बदली जिले की प्रशासनिक व्यवस्था, 7 बार बदला गया उपायुक्त का चैंबर

गुमला: स्वतंत्रता के बाद से लेकर अब तक गुमला क्षेत्र ने प्रशासनिक एवं ढांचागत विकास के कई चरण देखे हैं। ब्रिटिश कालीन संघर्षों से लेकर जमींदारी प्रथा के विरुद्ध उलगुलान तक, गुमला का इतिहास गौरवशाली आंदोलनों से भरा रहा है। समय चक्र के साथ यहाँ के सामाजिक, राजनीतिक और प्रशासनिक ढांचे में व्यापक परिवर्तन दर्ज किए गए हैं। वरिष्ठ पत्रकार विजय आनंद के अनुसार, 50 व 60 के दशक का गुमला आज के आधुनिक गुमला से बिल्कुल भिन्न था।
17 मई 1983 तक गुमला एकीकृत रांची जिले का एक अनुमंडल (Sub-Division) हुआ करता था। इसके पश्चात, 18 मई 1983 को बिहार के तात्कालिक मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्रा ने एक विशाल समारोह में गुमला को पूर्ण जिले का दर्जा प्रदान किया। जिस स्थान पर जिला स्थापना का समारोह संपन्न हुआ था, वह स्थान आज एक वृहद स्टेडियम के रूप में विकसित हो चुका है।
जिले के विकास के साथ बदला उपायुक्त कार्यालय
गुमला के प्रशासनिक सफर की सबसे अनोखी विशेषता यहाँ के उपायुक्त (DC) कार्यालय और उनके व्यक्तिगत चैंबर से जुड़ी रही है। जिले के प्रथम उपायुक्त द्वारका प्रसाद के कार्यकाल के दौरान चैंबर में परमवीर चक्र विजेता लांस नायक अल्बर्ट एक्का का चित्र स्थापित किया गया था। प्रशासनिक आवश्यकताओं और बुनियादी ढांचे के विस्तार के साथ अब तक उपायुक्त का चैंबर कुल सात अलग-अलग स्थानों पर स्थानांतरित किया जा चुका है।
लालू यादव के चॉपर से जुड़ा किस्सा
एक दिलचस्प ऐतिहासिक घटनाक्रम के तहत जब चुनाव आचार संहिता प्रभावी थी, तब बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव का हेलीकॉप्टर गुमला उतरा। वे सीधे उपायुक्त के चैंबर में पहुंचे, जहां सुरक्षाकर्मियों ने मीडियाकर्मियों के प्रवेश पर रोक लगा दी। लगभग 15 से 20 मिनट की गोपनीय बातचीत के बाद वे वापस रवाना हो गए। चुनाव आचार संहिता के दौरान बंद कमरे में हुई इस भेंट को लेकर उस समय प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में काफी चर्चाएँ हुई थीं।
विकास भवन से समाहरणालय तक पहुंचा कार्यालय
प्रारंभिक दौर के बाद उपायुक्त का दफ्तर स्टेडियम नंबर दो के समीप निर्मित नए भवन में स्थानांतरित हुआ। तत्पश्चात, तत्कालीन उपायुक्त ए.एन.पी. सिन्हा के समय में उपायुक्त कार्यालय एवं उनकी अदालत (Court) को नवनिर्मित समाहरणालय भवन में ले जाया गया। यहाँ कई वर्षों तक जिला प्रशासन का कामकाज चला।
इसके बाद पाँचवाँ बदलाव तब आया जब अंचल कार्यालय परिसर की खाली भूमि पर नया ढांचा तैयार कर चैंबर स्थानांतरित किया गया। स्थान सीमित होने के कारण छठवीं बार चैंबर को पास के ही एक अन्य भवन में शिफ्ट करना पड़ा।
चंदाली में बना आधुनिक समाहरणालय
गुमला उपायुक्त कार्यालय का सातवाँ और सबसे प्रमुख बदलाव जिला मुख्यालय से लगभग पाँच किलोमीटर दूर चंदाली में देखने को मिला। यहाँ एक भव्य व अत्याधुनिक समाहरणालय भवन का निर्माण कर ऑनलाइन उद्घाटन किया गया, जहाँ अब जिले के सभी प्रमुख प्रशासनिक विभाग एकीकृत रूप से संचालित हो रहे हैं।
झारखंड के प्रशासनिक इतिहास में संभवतः गुमला एकमात्र ऐसा जिला है जहाँ समय और प्रशासनिक विस्तार के कारण उपायुक्त का चैंबर सात अलग-अलग स्थानों पर बदला गया। यह क्रम केवल एक कार्यालय के स्थानांतरण को नहीं, बल्कि गुमला के 43 वर्षों के विकास गाथा को दर्शाता है।


