जब धनबाद की बहू ने पाकिस्तानियों को चटाई थी धूल…, कारगिल गर्ल गुंजन सक्सेना की कहानी

[Intro / Sub-heading] कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय रक्षा बलों के अदम्य पराक्रम और बलिदान की कई गाथाएं आज भी देशवासियों को गौरवान्वित करती हैं। इन्हीं शूरवीरों में एक अहम नाम फ्लाइट लेफ्टिनेंट गुंजन सक्सेना का है, जिन्हें देश ‘कारगिल गर्ल’ के नाम से जानता है। बहुत कम लोग इस बात से वाकिफ हैं कि इस जांबाज महिला सैन्य अधिकारी का झारखंड के धनबाद शहर से बेहद गहरा नाता है। वर्ष 2002 में उनका विवाह धनबाद के धैया क्षेत्र के निवासी गौतम नारायण से हुआ था, जिसके चलते वे धनबाद की बहू भी कहलाती हैं।
गुंजन सक्सेना का चयन वर्ष 1996 में शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) के तहत भारतीय वायुसेना में पायलट के पद पर हुआ था। उस दौर में सशस्त्र बलों में महिला फाइटर या हेलीकॉप्टर पायलटों की संख्या नगण्य थी और युद्ध अभियानों में उनकी तैनाती दुर्लभ मानी जाती थी। लेकिन गुंजन ने अपने दृढ़ संकल्प और कार्यकुशलता के बल पर इस रूढ़िवादी सोच को बदल कर रख दिया।
साल 1999 में जब भारत-पाकिस्तान के बीच कारगिल युद्ध छिड़ा, तब गुंजन सक्सेना ने दुर्गम और चुनौतीपूर्ण पहाड़ियों के बीच चेतक हेलीकॉप्टर के जरिए कई संवेदनशील और जोखिम भरे अभियानों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। दुश्मन की तरफ से हो रही लगातार गोलाबारी के बावजूद उन्होंने घायल सैनिकों को युद्ध क्षेत्र से सुरक्षित बाहर निकाला, अग्रिम मोर्चों तक जरूरी रसद व हथियार पहुंचाए और महत्वपूर्ण सूचनाओं का आदान-प्रदान किया। उनकी इस अभूतपूर्व सेवा ने सेना के अभियानों में निर्णायक भूमिका निभाई।
उनके इस अदम्य साहस, असाधारण वीरता और देश सेवा के लिए उन्हें प्रतिष्ठित शौर्य चक्र सम्मान से नवाजा गया। आगे चलकर उनके इस प्रेरणादायक जीवन पर ‘गुंजन सक्सेना: द कारगिल गर्ल’ नाम से एक बॉलीवुड फिल्म भी बनाई गई, जिससे उनकी शौर्यगाथा घर-घर तक पहुंची।
लखनऊ निवासी सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल अनूप कुमार सक्सेना की सुपुत्री गुंजन आज भी देश की युवा पीढ़ी और बेटियों के लिए एक बेहतरीन मिसाल हैं। कारगिल की बर्फीली चोटियों पर उनके पराक्रम ने यह साबित कर दिखाया कि राष्ट्ररक्षा के पथ पर महिलाओं का योगदान किसी से पीछे नहीं है। कोयलांचल धनबाद के लिए भी यह बेहद गर्व का विषय है कि इस वीरांगना का संबंध उनके शहर से जुड़ा हुआ है।
