Chandil : चांडिल बांध विस्थापितों के पुनर्वास में भेदभाव का आरोप, कालिंदी समाज ने लंबित मुआवजा और भूमि आवंटन की उठाई मांग…

Seraikella : चांडिल बांध से विस्थापित कालिंदी समाज के परिवारों ने पुनर्वास प्रक्रिया में कथित भेदभाव का आरोप लगाते हुए प्रशासन से शीघ्र हस्तक्षेप की मांग की है। समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि वर्षों बीत जाने के बावजूद अनेक विस्थापित परिवार आज भी स्थायी पुनर्वास और बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं।
कालिंदी समाज के जिला अध्यक्ष कृष्णा कालिंदी ने आरोप लगाया कि पुनर्वास कार्यालय द्वारा विस्थापित परिवारों के साथ समान व्यवहार नहीं किया जा रहा है। उनका कहना है कि जिन परिवारों ने अपनी पुश्तैनी जमीन और संपत्ति चांडिल बांध परियोजना के लिए खो दी, उन्हें अन्य विस्थापितों की तरह पुनर्वास का लाभ नहीं मिल सका। उन्होंने दावा किया कि गौरांकोचा क्षेत्र में सैकड़ों विस्थापित कालिंदी परिवार आज भी अस्थायी परिस्थितियों में जीवन यापन करने को विवश हैं। उनके अनुसार, कुछ परिवार तंबुओं में तो कुछ स्कूल भवनों में रह रहे हैं, जबकि उनकी समस्याओं के समाधान की दिशा में अपेक्षित पहल नहीं की गई है।
वहीं कृष्णा कालिंदी ने कहा कि यदि विभाग शीघ्र इस मामले का संज्ञान लेकर लंबित समस्याओं का समाधान नहीं करता है, तो कालिंदी समाज व्यापक आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।

उन्होंने बताया कि हाल ही में जमशेदपुर स्थित सर्किट हाउस में आयोजित एक बैठक के दौरान जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के समक्ष भी उन्होंने यह मुद्दा उठाया। बैठक में उन्होंने चांडिल बांध परियोजना से विस्थापित परिवारों के लंबित मुआवजा भुगतान, पुनर्वास स्थल पर भूमि आवंटन तथा स्वरोजगार के लिए आवश्यक योजनाओं को तत्काल लागू करने की मांग रखी।
कालिंदी समाज का कहना है कि विस्थापित परिवारों को उनका वैधानिक अधिकार और सम्मानजनक पुनर्वास मिलना चाहिए। समाज ने प्रशासन से मांग की है कि विस्थापितों की स्थिति का निष्पक्ष सर्वे कर उनकी लंबित समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए।
(नोट: इस समाचार में पुनर्वास पदाधिकारी और संबंधित विभाग पर लगाए गए आरोप कालिंदी समाज के प्रतिनिधियों के दावों पर आधारित हैं। संबंधित विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)
