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October 27, 2026

Suryoday Samvaad

Nayi Soch Nayi Disha

CHANDIL : जंगली हाथी के आतंक से तिरुलडीह ग्रामीण सहमे, तोड़े घर, चट गए अनाज, विभाग मौन…

बिष्णु पद महापात्र 📲 9471102055 (wa)

SERAIKELLA : सराईकेला-खरसवाँ जिले की चांडिल अनुमंडल क्षेत्र के गाँव सुकसारी की टोला तिरूलडीह में शुक्रवार की तड़के करीब ढाई बजे जंगली हाथियों ने आतंक मचाया। गाँव मे हाथियों के प्रवेश करने की सूचना से ही ग्रामीण डरे सहमे हुए थे और सभी प्रत्यक्ष रूप से अपनी गाँव मे हाथियों के तांडव देख रहे थे।

ग्रामीणों के माने तो उनके विवशता यह है की वेलोग गरीब है तथा संसाधन का अभाव है। इसलिए पिछले कई महीनों से रात को प्रत्येक परिवार की एक सदस्य को सोने की वजाय सजग रहना होता है। इसी बीच शुक्रवार तड़के करीब ढाई बजे एकाधिक विशालकाय जंगली हाथि गाँव मे प्रवेश कर गाँव के कालीपद कुम्हार की मकान को तोड़कर चावल तथा अन्य खाद्यान्न सामग्री को खा गए तथा पास के और एक घर को तोड़ डाला।

गनीमत है कि उस वक़्त घर से सभी लोग भाग गए वरना एक बहुत बड़ा हादसे की शिकार हो जाता। बताया जा रहा है कि रसुनिया पंचायत के ऐसे ही जंगली हाथियों द्वारा कोई न कोई गाँव में प्रतिदिन किसी न किसी के घर को क्षति पहुंचाया जा रहा है। गाँव मे भय का माहौल इसलिए बना है कि सूरज के ढलते ही रात अंधेरे में जंगली हाथियों के झुंड भोजन की तलाश में भटकते हुए गांव में पहुंच जाते हे और घरों को क्षति पहुंचाते हे। घरों को तोड़ कर घर मे रखे अनाज को अपना निवाला बनाते हे । 

इस संवंध में ग्रामीणों ने बताया कि गजों की झुंड द्वारा घरों को क्षति पहुंचाने को लेकर सूचना स्थानीय विधायक और चांडिल वन क्षेत्र के पदाधिकारी को देने के बावजूद अबतक ग्रामीणों का सुध लेने कोई नहीं पहुंचा । यह सिलसिला पिछले कई महीनों से चल रही है लेकिन अब तक स्थानीय प्रशासन या वन विभाग द्वारा किसी भी ठोस पहल नहीं किया गया है जिससे ग्रामीणों ने नाराजगी जताई।

उन्हीने अफसोस जताया कि वन विभाग द्वारा अब तक यह भी पता नहीं लगा पाया किया की आखिर यह हाथियों के झुंड गाँव मे आता कहां से है और यह दिनभर कहाँ डेरा डाले रहता है। बता दें कि लगातार कई दिनों से यह सूचना मिल रही है कि हाथियों के झुंड दिनभर चाण्डिल जलाशय में जलक्रीड़ा करते देखा जाता है। ओर शाम ढलते ही भोजन की तलाश में जंगल से उतर कर गांव में पहुंच जाते ओर उपद्रव मचाने लगते है तथा खासकर मिट्टी की घरों को ज्यादा निशाना बनाते हे।

चांडिल अनुमंडल क्षेत्र के एक मात्र दलमा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी है जहाँ गज परियोजना के नाम से भी जाना जाता है  लेकिन वहाँ पर पर्याप्त मात्रा में भोजन नहीं मिलने के कारण आज हाथियों की झुंड ईचागढ़ विधान सभा क्षेत्र में विभिन्न स्थानों की छोटे-बड़े जंगलों में डेरा डाला हुआ हे। एक तरफ वन एवं पर्यावरण विभाग को केंद्र सरकार तथा राज्य सरकार की ओर से करोड़ों रुपया मुहैया कराते है।

इस उद्देश्य में की जंगल ओर वन्य प्राणी को संरक्षण प्राप्त हो । परंतु धरातल में देखा जाय तो विभाग की ओर से इसपर किया जा रहा पहल पर क्षेत्र में घटित ऐसी घटनाओं के लिए विभाग की सक्रियता पर प्रश्न चिह्न लगता है। और अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि आज इसी वजह से उक्त सेंचुरी से वन्य जीव पलायन करने को विवश है, जो वास्तविक जांच की विषय है।

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