चतरा : ऑनलाइन फार्मेसी और भारी छूट के विरोध में मेडिकल स्टोर रहे बंद

चतरा: इंटरनेट के माध्यम से दवाओं की बिक्री (ऑनलाइन फार्मेसी) और ई-प्लेटफॉर्म पर मिलने वाले अत्यधिक डिस्काउंट के खिलाफ चतरा जिले के दवा विक्रेता एकजुट हो गए हैं। केमिस्ट और ड्रगिस्ट एसोसिएशनों द्वारा बुलाई गई देशव्यापी हड़ताल का असर चतरा में साफ तौर पर देखा गया। बुधवार (20 मई) को विरोध स्वरूप जिले भर की अधिकांश दवा दुकानें पूरी तरह से बंद रहीं। ऑल इंडिया आर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट (AIOCD) के नेतृत्व में किए गए इस बंद के कारण स्थानीय बाजारों में आवश्यक दवाओं की किल्लत देखी गई, जिससे इलाज कराने आए मरीजों और उनके परिजनों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
भारी छूट और नियमों की अनदेखी का लगाया आरोप
आंदोलन कर रहे स्थानीय दवा व्यापारियों का आरोप है कि बड़ी ई-फार्मेसी कंपनियां तय नियमों और दिशा-निर्देशों का खुलेआम उल्लंघन कर रही हैं। यह कंपनियां बाजार में अनुचित प्रतिस्पर्धा पैदा करने के लिए दवाओं पर 30 से 60 प्रतिशत तक की भारी छूट दे रही हैं, जिसके कारण पारंपरिक (ऑफलाइन) मेडिकल स्टोर संचालकों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। इसके अलावा, प्रदर्शनकारियों ने यह चिंता भी जताई कि उचित और वैध डॉक्टरी पर्चे (Prescription) के बिना ऑनलाइन माध्यमों से बिकने वाली दवाओं के कारण नकली और एक्सपायरी डेट की दवाओं का जोखिम बढ़ रहा है, जो सीधे तौर पर आम लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है।

सख्त नीति नहीं बनी तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी
चतरा जिला केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट लहजे में कहा कि यदि केंद्र और राज्य सरकार ने ऑनलाइन दवा व्यापार को नियंत्रित करने के लिए जल्द ही कोई ठोस और पारदर्शी नियमावली लागू नहीं की, तो वे अपने इस आंदोलन को और उग्र रूप देने के लिए मजबूर होंगे। हालांकि, आम जनता की सहूलियत और मानवीय आधार को ध्यान में रखते हुए अस्पतालों तथा आपातकालीन स्वास्थ्य केंद्रों के परिसरों में स्थित कुछ चुनिंदा दवा काउंटरों को आंशिक रूप से चालू रखा गया था, ताकि गंभीर मरीजों को तत्काल दवाएं मिल सकें।
ऑफलाइन दुकानदारों के हितों की रक्षा की मांग
एसोसिएशन ने सरकार के समक्ष अपनी प्रमुख मांगें रखते हुए कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बिकने वाली जीवन रक्षक दवाओं के लिए एक समान नियामक ढांचा (समान नियम) तैयार किया जाना चाहिए। दवा दुकानदारों ने मांग की है कि देश भर के लाखों खुदरा दवा विक्रेताओं और उनके परिवारों के रोजगार को बचाने के लिए ई-फार्मेसियों की मनमानी पर तुरंत अंकुश लगाया जाए और ऑफलाइन केमिस्टों के व्यापारिक हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
