गुमला: कुरूमगढ़ वन क्षेत्र में तेंदुआ का आतंक, पहाड़ से उतरकर कर रहा पशुओं का शिकार

Gumla News: गुमला जिले के कुरूमगढ़ वन क्षेत्र में पिछले कुछ समय से एक तेंदुए ने अपना ठिकाना बना लिया है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों में भारी डर का माहौल है। जानकारी के अनुसार, मालम पंचायत के कतारीकोना गांव में हाल ही में इस तेंदुए को देखा गया है। तेंदुए ने गांव के लालसाय असुर की एक गर्भवती गाय पर हमला कर उसे अपना शिकार बनाया और फिर घने जंगल में ओझल हो गया। इससे पहले भी वह कोल्हूकोना और कच्चापाठ जैसे गांवों में कई बकरियों और गायों को मार चुका है।
6 महीने से डेरा जमाए तेंदुआ, ग्रामीणों में दहशत
वन विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, यह तेंदुआ पिछले करीब 6 महीनों से इस वन क्षेत्र में सक्रिय है। शुरुआत में लोगों को इसकी मौजूदगी का अहसास नहीं था, लेकिन जब पालतू जानवरों के गायब होने और उनके शिकार की घटनाएं बढ़ने लगीं, तो ग्रामीणों को संदेह हुआ। वन विभाग ने पंजों के निशान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर क्षेत्र में चितकबरे तेंदुए की मौजूदगी की पुष्टि की है। गौरतलब है कि करीब डेढ़ साल पहले भी इस इलाके में एक बाघ ने काफी आतंक मचाया था, जो पलामू के जंगलों से होकर यहां पहुंचा था।
कहीं इंसान भी न बन जाए तेंदुआ का शिकार
पशुओं के लगातार हो रहे शिकार से ग्रामीण इस बात को लेकर चिंतित हैं कि कहीं अब तेंदुआ इंसानों पर हमला करना शुरू न कर दे। कतारीकोना, कोल्हुकोना और कच्चापाठ जैसे आदिम जनजाति बहुल गांवों के लोग शाम ढलते ही घरों में कैद होने को मजबूर हैं। प्रभावित पशुपालकों ने वन विभाग से मारे गए मवेशियों के लिए उचित मुआवजे की मांग की है और तेंदुए को जल्द से जल्द वहां से भगाने या पकड़ने की अपील की है।

तेंदुआ ने पहाड़ पर बच्चे को जन्म दिया है – ग्रामीण
स्थानीय ग्रामीण ज्योति लकड़ा के अनुसार, कतारीकोना और कोल्हूकोना गांव घने जंगलों और ऊंचे पहाड़ों से घिरे हुए हैं, जिससे यहां जंगली जानवरों का आना-जाना लगा रहता है। ग्रामीणों का कहना है कि तेंदुए ने कतारीकोना पहाड़ की एक गुफा में बच्चे को जन्म दिया है। अपने बच्चे की सुरक्षा और भोजन की तलाश में वह अक्सर पहाड़ से नीचे उतरकर गांव की बस्तियों में घुस आता है।
वन विभाग ने बढ़ाई निगरानी
तेंदुए की गतिविधियों को देखते हुए वन विभाग पूरी तरह सतर्क है। डीएफओ अहमद बेलाल अनवर ने बताया कि विभाग की टीम तेंदुए की हर हरकत पर पैनी नजर रख रही है। क्षेत्र में ‘कैमरा ट्रैप’ लगाए जा रहे हैं ताकि उसकी सटीक लोकेशन का पता लगाया जा सके। विभाग की प्राथमिकता यह है कि तेंदुआ आबादी वाले क्षेत्रों से दूर जंगल के भीतर ही रहे। साथ ही, उन्होंने प्रभावित किसानों से कहा है कि वे मुआवजे के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन कर सकते हैं।
