RIMS Dental College के इंटर्न डॉक्टरों ने रोकी OPD! निदेशक के आश्वासन पर खत्म हुई हड़ताल

रांची स्थित रिम्स (RIMS) डेंटल कॉलेज के इंटर्न डॉक्टरों ने पिछले कई महीनों से स्टाइपेंड न मिलने के विरोध में काम ठप कर दिया। मंगलवार को डॉक्टरों की इस अचानक हड़ताल के कारण अस्पताल की ओपीडी (OPD) सेवाएं लगभग ढाई घंटे तक बाधित रहीं। हालांकि, रिम्स निदेशक डॉ. डीके सिन्हा द्वारा शाम तक बकाया राशि जारी करने का ठोस भरोसा दिए जाने के बाद डॉक्टरों ने अपना आंदोलन वापस ले लिया और पुनः ड्यूटी पर लौट आए।

साढ़े तीन महीने से नहीं मिला था स्टाइपेंड
आंदोलनरत इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें बीते करीब साढ़े तीन महीनों से उनके भत्ते (स्टाइपेंड) का भुगतान नहीं किया गया था। इस समस्या को लेकर वे लगातार संस्थान प्रबंधन के संपर्क में थे। डॉक्टरों का आरोप है कि प्रबंधन द्वारा हर बार तकनीकी अड़चनों की बात कहकर मामले को टाला जा रहा था। लंबे समय तक आर्थिक तंगी झेलने के बाद मजबूरन डॉक्टरों को विरोध का रास्ता चुनना पड़ा।
हड़ताल से मरीजों को हुई परेशानी
मंगलवार सुबह इंटर्न डॉक्टरों के कार्य बहिष्कार के चलते डेंटल कॉलेज की बाहरी रोगी विभाग (OPD) की व्यवस्था चरमरा गई। दूर-दराज से दांतों के इलाज के लिए पहुंचे मरीजों और परिजनों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा। हालांकि, स्थिति को संभालने के लिए वरिष्ठ डॉक्टरों ने मोर्चा संभाला और सेवाएं बहाल रखने की कोशिश की, फिर भी इंटर्न डॉक्टरों के न होने से ओपीडी परिसर में मरीजों को खासी मशक्कत करनी पड़ी।
निदेशक के आश्वासन पर खत्म हुई हड़ताल
हड़ताल की सूचना मिलते ही रिम्स निदेशक डॉ. डीके सिन्हा सुबह करीब 11:30 बजे डेंटल कॉलेज पहुँचे। उन्होंने प्रदर्शनकारी डॉक्टरों से सीधी बातचीत कर उनकी शिकायतों को सुना। निदेशक ने डॉक्टरों को आश्वस्त किया कि मंगलवार शाम तक उनका बकाया स्टाइपेंड जारी कर दिया जाएगा। इस आधिकारिक आश्वासन के बाद डॉक्टरों ने सर्वसम्मति से हड़ताल समाप्त करने का फैसला लिया और काम संभाल लिया।

इंटर्न डॉक्टरों को मिलता है 30 हजार रुपए स्टाइपेंड
वर्तमान में रिम्स डेंटल कॉलेज में कुल 39 इंटर्न डॉक्टर कार्यरत हैं। नियमानुसार प्रत्येक इंटर्न डॉक्टर को प्रतिमाह ₹30,000 की सम्मान राशि (स्टाइपेंड) दी जाती है। पिछले साढ़े तीन महीनों से भुगतान अटकने के कारण डॉक्टरों को अपने दैनिक खर्चों और पढ़ाई के प्रबंधन में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। निदेशक के हस्तक्षेप के बाद अब उन्हें समय पर भुगतान होने की पूरी उम्मीद है।

