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October 27, 2026

Suryoday Samvaad

Nayi Soch Nayi Disha

यूके ने बैन किया स्टडी वीजा, इन 4 देशों के खिलाफ अचानक क्यों लिया कड़ा फैसला?

UK Suspends Study Visa: यूके ने बुधवार को चार देशों के ‘स्टडी वीजा’ पर प्रतिबंध लगा दिया. ब्रिटिश प्रशासन ने इन पर स्थायी एसाइलम (शरण) पाने के लिए इस तरीके का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया. यह प्रतिबंध शरण हासिल करने के लिए आवेदनों की बढ़ती संख्या पर लगाम लगाने के बड़े अभियान का हिस्सा है. स्टडी वीजा पर लगाया गया यह तथाकथित ‘आपात प्रतिबंध’ अफगानिस्तान, कैमरून, म्यांमार और सूडान पर लागू होंगे. सरकार ने यह भी कहा है कि अफगानिस्तान के नागरिकों के लिए स्किल्ड वर्क वीजा भी निलंबित कर दिया जाएगा. यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब ब्रिटेन में नए और कड़े शरण नियम लागू हो गए हैं. 

आव्रजन नियमों में बदलाव के माध्यम से बृहस्पतिवार को वीजा प्रतिबंध लागू किया जाएगा, जो 26 मार्च से प्रभावी होगा. यूके के गृह मंत्रालय (होम ऑफिस) ने मंगलवार को जारी बयान में कहा कि यह कदम उन शरणार्थियों पर लगाम लगाने की कोशिश है, जो कानूनी रास्तों से यूके में प्रवेश करने के बाद शरण (असाइलम) की मांग करते हैं. होम ऑफिस के अनुसार, चार देशों के नागरिकों के लिए वीजा पर पहली बार ‘इमरजेंसी ब्रेक’ लगाया गया है, क्योंकि कानूनी रास्तों से आने वालों के बीच शरण के दावों में तेज़ बढ़ोतरी हुई है.

2021 से कितने लोग पहुंचे ब्रिटेन

यूके होम ऑफिस के अनुसार, 2021 से अब तक करीब 1,35,000 लोग वैध वीजा के जरिए ब्रिटेन पहुंचे और बाद में शरण के लिए आवेदन कर दिया. सरकार का कहना है कि उसने 2025 में छात्र वीजा धारकों के शरण दावों में 20% की कमी लाई है, लेकिन अभी भी स्टूडेंट वीजा पर आने वाले लोग कुल शरण दावों का लगभग 13% हिस्सा हैं, इसलिए ‘और सख्त कदम’ उठाने की जरूरत है. सरकार के मुताबिक, अफगानिस्तान, कैमरून, सूडान और म्यांमार के छात्रों द्वारा शरण के लिए किए गए आवेदन 2021 से 2025 के बीच 470% से ज्यादा बढ़ गए हैं.

यह कदम ऐसे समय उठाया गया, जब ब्रिटेन की गृह सचिव शबाना महमूद इस सप्ताह संसद में नया विधेयक पेश कर रही हैं. महमूद ने कहा, ‘ब्रिटेन, युद्ध और उत्पीड़न से भाग रहे लोगों को हमेशा शरण देगा, लेकिन हमारी वीजा प्रणाली का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए.’ उन्होंने कहा, ‘इसलिए मैं उन नागरिकों को वीजा देने से इनकार करने का निर्णय ले रही हूं, जो हमारी उदारता का फायदा उठाना चाहते हैं. मैं अपनी सीमाओं पर व्यवस्था और नियंत्रण बहाल करूंगी.’

चारों देशों से शरण मांगने वालों की संख्या में बढ़ोतरी

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, गृह मंत्रालय के बताया कि जिन चार देशों को चिन्हित किया गया है, वहां से आने वाले अपेक्षाकृत ज्यादा लोगों ने शरण मांगते समय गरीबी को प्रमुख कारण बताया है. वर्तमान में इन चार देशों के करीब 16,000 लोगों को ब्रिटेन में सहायता दी जा रही है. आंकड़ों के अनुसार, 2021 से स्टूडेंट वीजा पर ब्रिटेन पहुंचे लगभग 95% अफगान नागरिकों ने बाद में शरण के लिए आवेदन कर दिया. वहीं म्यांमार के छात्रों के शरण आवेदनों में करीब 16 गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि कैमरून और सूडान के छात्रों के दावों में चार गुना से ज्यादा इजाफा हुआ है.

पहले और अब के नियम में क्या अंतर?

पहले के नियमों के अनुसार, शरणार्थी का दर्जा मिलने के बाद 5 साल तक रहने की अनुमति मिलती थी. इसके बाद वे स्थायी निवास (इंडेफिनिट लीव टू रिमेन) और नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते थे.

नए नियमों के तहत, होम ऑफिस अब शरणार्थियों और उनके साथ आए बच्चों की हर 30 महीने में शरणार्थी स्थिति की समीक्षा करेगा. जिन देशों को सुरक्षित माना जाएगा, वहां के शरणार्थियों से वापस अपने देश लौटने की अपेक्षा की जाएगी. 

हालांकि, अकेले आए बच्चों को अभी भी 5 साल तक रहने की अनुमति मिलती रहेगी, जब तक कि सरकार इस समूह के लिए दीर्घकालिक नीति तय नहीं कर लेती. इसके साथ ही जो शरणार्थी पहले से ब्रिटेन में हैं, उनका मूल्यांकन पुराने नियमों के तहत ही किया जाएगा.

यूरोपीय देशों में बढ़ रही सख्ती

डीडब्लू की एक रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटिश सरकार की यह नई नीति काफी हद तक डेनमार्क के मॉडल से प्रेरित है, जिसे यूरोप में सबसे कड़े शरण और आव्रजन सिस्टम में से एक माना जाता है. वहां 2015 से शरणार्थी दर्जे की हर दो साल में समीक्षा की जाती है. ब्रिटेन की राजनीति में आव्रजन (माइग्रेशन) एक बड़ा मुद्दा बन चुका है. इसी बीच रिफॉर्म यूके पार्टी अपने कड़े एंटी-माइग्रेशन रुख के कारण जनमत सर्वेक्षणों में तेजी से आगे बढ़ रही है.

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